नक्षत्र का अक्षर कैसे काम करता है
जन्म नक्षत्र आकाश में एक स्थान है। अक्षर वह ध्वनि है जो परिवार अक्सर उस स्थान से लेते हैं।
भारतीय नामकरण अक्सर पसंदीदा नामों की सूची से नहीं, चंद्रमा से शुरू होता है। आकाश 27 नक्षत्रों में बँटा है। हर नक्षत्र फिर चार पादों में बँटता है। पारंपरिक तालिका हर पाद को एक या अधिक शुरुआती ध्वनियाँ देती है।
चंद्रमा रोहिणी के दूसरे पाद में हो तो कई परिवार व ध्वनि से शुरू होने वाला नाम ढूंढते हैं। पूरे नक्षत्र की फिर भी चार ध्वनियाँ हैं, और कुछ घर इन चारों में से कोई भी लेते हैं। कुछ पाद की अपनी ध्वनि पर ही रहते हैं। संस्कार कराने वाले से पूछें कि आपका परिवार कौन-सा नियम मानता है।
नवनाम क्या गणना करता है
तारीख डालें, और पता हो तो समय भी। चंद्रमा की स्थिति आपके फ़ोन पर लाहिड़ी अयनांश से निकाली जाती है, जो ज़्यादातर भारतीय पंचांगों में प्रयुक्त माप है। फिर आपको नक्षत्र, पाद, राशि और उस पाद की ध्वनियाँ दिखती हैं।
चंद्रमा सीमा से एक अंश के पाँचवें हिस्से के भीतर हो तो दोनों ओर दिखाए जाते हैं। समय अज्ञात हो और उस दिन चंद्रमा नक्षत्र बदले, तो दोनों नक्षत्र दिखाए जाते हैं। पेज आपकी ओर से एक नहीं चुनता।
ध्वनि शुरुआत है, बंधन नहीं
अक्षर शुरुआत है, वर्तनी का नियम नहीं। आरव और अमन दोनों अ ध्वनि ले सकते हैं और फिर भी घर में अलग लगते हैं। उपनाम के साथ पूरा नाम बोलें। कोई बड़ा एक बार सुनकर न दोहरा पाए, तो उसी ध्वनि में खोज जारी रखें।
सवाल
- नक्षत्र पाद क्या है?
- 27 नक्षत्रों में से हर एक चार बराबर भागों में बँटा है, जिन्हें पाद कहते हैं। पाद शुरुआती ध्वनि को और सीमित करता है।
- क्या सिर्फ़ पाद की ध्वनि ही लेनी होगी?
- परिवार अलग होते हैं। कुछ पाद का अपना अक्षर लेते हैं। कुछ उस नक्षत्र की चारों में से कोई भी ध्वनि मान लेते हैं। नामकरण कराने वाले से नियम पक्का करें।
- अगर जन्म समय पता न हो तो?
- जन्म विवरण फ़ॉर्म में यह बताएं। उस दिन चंद्रमा नक्षत्र बदले तो एक अनुमान के बजाय दोनों संभावनाएँ दिखाई जाती हैं।